अभिलेखों में प्राचीन भारत की भाषाएँ व सामान्य गणित और अन्य विषय

By | October 10, 2020

अभिलेखों में प्राचीन भारत की भाषाएँ व सामान्य गणित और अन्य विषय पालि-प्राकृत हम जो कुछ बोलते हैं, वह भाषा है। प्राचीन समय में लोक में प्रचलित भाषा को ही लेखों में स्थान देने का प्रयत्न किया गया था। भारत में प्राप्त विदेशी भाषा के आधतम अभिलेख अरमइक भाषा में हैं। उनका समय तीसरी शती… Read More »

अभिलेखों में प्राचीन भारत की शिक्षा एवम कला

By | October 10, 2020

अभिलेखों में प्राचीन भारत की शिक्षा एवम कला प्रारम्भिक अभिलेखों में शिक्षण से सम्बन्धित जानकारी का अभाव है। जिससे यह ज्ञात होता है कि शिक्षा केन्द्रों का विकास परवर्ती है। प्रारम्भ में अध्यापक व्यक्तिगत रूप से शिक्षा देते थे। कालान्तर में गुरु के घर ने ही गुरुकुल का रूप ले लिया। दूसरी शती ई. के… Read More »

अभिलेखों में साहित्यिक विवरण

By | October 10, 2020

अभिलेखों में साहित्यिक विवरण प्रशस्तियों का उद्गम प्राचीन भारत में अभिलेखों को उत्कीर्ण कराने का उद्देश्य साहित्यिक न था। तो भी, उनके अध्ययन से प्रकट होता है कि प्रशस्तिकार उच्चकोटि का विद्वान् होता था। वह साहित्यशास्त्र का पूर्ण ज्ञाता होता था। प्रशस्तिया प्रायः प्राकृत या संस्कृत में लिखी जाती थीं। इन प्रशस्तियों में खारवेल का… Read More »

अभिलेखों में प्राचीन भारत की सामाजिक स्थिति

By | October 10, 2020

अभिलेखों में प्राचीन भारत की सामाजिक स्थिति भारतीय समाज में वर्णाश्रम धर्म की प्रमुखता थी। धर्मशास्त्रों में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र — ये चार प्रमुख वर्ण बताये गये हैं। अभिलेखों में वर्णाश्रम धर्मपालन की बात विशेषरूप से मिलती है। शासन या दान के प्रसंग में वर्णों का उल्लेख हुआ है। अशोक के प्रज्ञापनों में… Read More »

अभिलेखों में प्राचीन भारत का धार्मिक इतिहास

By | October 10, 2020

अभिलेखों में प्राचीन भारत का धार्मिक इतिहास प्राचीन भारतीय लेखों के अनुशीलन से ज्ञात होता है कि अधिकांश अभिलेखों का प्रणयन धार्मिक भावना से प्रेरित है। राजाओं के अभिलेखों के प्रारम्भ में इष्ट देवता का ध्यान मिलता है। अनेक प्रलेखों के वर्ण्य विषयों में भी विशिष्ट देतों की विस्तृत चर्चा की गयी है। बहुसंख्यक लेखों… Read More »

अभिलेखों में प्राचीन भारत की आर्थिक दशा

By | October 10, 2020

अभिलेखों में प्राचीन भारत की आर्थिक दशा प्राचीनभारत में आर्थिक स्थिति का पता विभिन्न युगों के अभिलेखों से चला है। व्यवसायों एवं व्यापार की वृद्धि में प्राचीन श्रेणियों या आर्थिक निगमों ने विशेष योगदान दिया। कुषाणों तथा गुप्तों के समय में स्वर्ण सिक्के बड़ी संख्या में जारी किये गये। उस समय विदेशी व्यापार भी बहुत… Read More »

अभिलेखों में राजनीतिक इतिहास

By | October 12, 2020

भारतीय इतिहास लेखन में अभिलेखों का महत्व सर्वोपरि है। उनके उत्कीर्ण कराने के उद्देश्य विविध थे। कुछ अभिलेख ऐसे हैं जिनमें वंशावली, ऐतिहासिक घटनाओं तथा महान् शासकों की उपलब्धियों के मनोरंजक वर्णन प्राप्त होते हैं। खारवेल का हाथीगुम्फा-अभिलेख और समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति ऐसे प्रलेख हैं जिनमें उक्त शासकों का प्रायः सम्पूर्ण जीवनचरित वर्णित है।… Read More »

प्राचीन भारत में ‘ लेखक ‘!

By | October 10, 2020

भारत में अक्षरों का आविष्कार साहित्यकारों, अध्यापकों और पुरोहितों ने साहित्यिक और धार्मिक कार्य सम्पन्न करने के लिये किया था। काफी समय तक लिखने-पढ़ने के काम में इन्हीं लोगों का एकाधिकार था। तो भी, कुछ ऐसे प्रमाण उपलब्ध हुए जिनसे ज्ञात होता है कि अत्यन्त प्राचीनकाल से ही यहां पेशेवर लेखक या उनका एक वर्ग… Read More »

विदेशो में भारतीय लिपियाँ

By | October 8, 2020

एशिया के अनेक देशों में भारतीय संस्कृति के प्रसार के साथ वहां भारतीय भाषाओं और लिपियों का प्रचलन हुआ। मध्य एशिया से संस्कृत, प्राकृत और क्षेत्रीय भाषाओं में खरोष्ठी, ब्राह्मी और ब्राह्मी से व्युत्पन्न लिपियों में बहुसंख्यक अभिलेख प्राप्त हुए है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में प्रचलित वर्णमालाएं भी ब्राह्मी से निकली हुई हैं। वहां के… Read More »

भारत में अक्षरों का आविष्कार किस तरह हुआ ?

By | October 7, 2020

भारत में अक्षरों का आविष्कार किस तरह हुआ ? साहित्यकारों, अध्यापकों और पुरोहितों ने साहित्यिक और धार्मिक कार्य सम्पन्न करने के लिये किया था। काफी समय तक लिखने-पढ़ने के काम में इन्हीं लोगों का एकाधिकार था। तो भी, कुछ ऐसे प्रमाण उपलब्ध हुए जिनसे ज्ञात होता है कि अत्यन्त प्राचीनकाल से ही यहां पेशेवर लेखक… Read More »