पानी से चलने वाली कार का विज्ञान

पानी से चलने वाली कार का विज्ञान

वैसे तो मोटर कारों के लिए वैकल्पिक ईंधन के रूप में बायोडीजल, एलपीजी, बैटरी, सीएनजी का उपयोग किया जाता है लेकिन  ईंधन के रुप में आपकी कार की  टैंक में पानी भरकर उससे कार चलाने का आइडिया कभी आपको आया हैं ? पेड़ की पत्तियां पूरी बन जाये , पानी का घी बन जाए तो ये बंदा उसमें पुरिया तलकर खाये जैसा खयाली पुलाव ही ये ख्याल लगता हैं ना ? क्योंकि कार के आंतरिक दहन इंजन में अगर दहनशील ईंधन ही ना डाले तो वह चलेगा कैसे ? सही हैं ना ?  तो इसे अग्निशमन पानी से कैसे चलाया जा सकता हैं ???ये  संभव ही नहीं है। आम तौर पर लगता है कि  ठंडा पानी ईंधन नहीं बन सकता। 

लेकिन इजरायल की वेइज़मैन साइंस इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता इस बात से सहमत नहीं ! वे सब पानी को एच H20 मानते हैं , पानी नहीं ! पानी तो  हाइड्रोजन का भंडार है, इसलिए ईंधन का भी  भंडार है। बस पानी में ऑक्सीजन के साथ गठबंधन करने वाली गैसों को छोड़ने का नुस्खा लागत और प्रभावी होना चाहिए। कई प्रयासों के बावजूद, इस तरह का कोई कीमिया आज तक सफल नही हुआ ! क्योंकि  हाइड्रोजन प्राप्त करने के लिए पानी का इलेक्ट्रोलिसिस में बहुत अधिक ऊर्जा की खपत होती है और परिणामस्वरूप मिलने वाला  गैस पेट्रोल या डीजल से अधिक महंगा पड़ता हैं।  प्राकृतिक गैस से हाइड्रोजन को छोडने का ये काम घाटे का व्यवसाय है। साथ ही सुविधाजनक टैंक में हाइड्रोजन का स्टोरज करना और एक समस्या है। यहां तक ​​कि अगर आप सीएनजी की तरह 10,000 पाउंड प्रति वर्ग इंच के दबाव से इस  गैस को सटोरेज करते हैं, तो इसका टैंक समान ऊर्जा के एक पेट्रोल टैंक से चार गुना बड़ा होगा, तो इसे मोटर में समायोजित करना तो और  मुश्किल हो जाता है। यहां तक ​​कि धातु के हाइड्राइड नामक नीले रंग के पदार्थ के टैंक में अवशोषित हाइड्रोजन भी कार को  माइलेज नहीं देता है। 


यह सच है कि यदि इस गैस को -2 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर ठंडा और तरलीकृत किया जाए , तो एक बहुत बड़े टैंक की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन उसके बाद  40% हाइड्रोजन  ऊर्जा उसी के द्रवीकरण की प्रक्रिया पर खर्च हो जाती  है। इन सभी कारणों से, हाइड्रोजन गैस वैकल्पिक ईंधन के रूप में मोटर कार में प्रतिस्थापित करने में कभी सक्षम नहीं रही है – कम से कम व्यावहारिक और किफायती तरीके से तो बिल्कुल नहीं । 


इज़राइल का Weizmann Science Institute के कुछ शोधकर्ता हाल ही में इस विचार के साथ आए की पानी की हाइड्रोलिसिस की महंगी विधि से छुटकारा पाने का कोई तरीका है जिससे  हाइड्रोजन को स्टोर ही न करना पड़े ! इज़राइली शोधकर्ताओ ने ऐसी कार की कल्पना की जिसमें इंजन द्वारा आवश्यक महंगी इलेक्ट्रोलिसिस के बजाय हाइड्रोजन को लगातार रासायनिक प्रक्रिया द्वारा उत्पन्न किया जाये और इंजन इसका उत्पादन करते समय इसका उपयोग करता है, इसलिए इसे गैस को स्टोर करने की भी आवश्यकता ही ना रहे । कुल मिलाकर, मांग के अनुसार मोटरकार में आपूर्ति की व्यवस्था कार में होती रहे । 


आपको जानकर ताजुब्बी होगी कि  यह विचार अब अमल के चरण पर पहुंच गया है। इज़राइली शोधकर्ताओं ने एक ऐसी  मोटर कार का निर्माण नहीं किया है, लेकिन उन्होंने इसके इंजन के अलावा अन्य आवश्यक उपकरणों पर प्रयोगशाला में इसका सफल परीक्षण किया है। उन्होंने हाइड्रोजन के निर्माण और उपयोग के मूल सिद्धांत का प्रदर्शन किया है – और विशेष रूप से साबित किया है कि पानी, बिजली से चलने वाली मोटर कार को चलाने के लिए कोयला, पेट्रोल या डीजल जैसे सस्ती ईंधन का किसी भी स्तर पर उपयोग नहीं किया जाता है। प्रत्यक्ष रूप से नहीं , अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं।

 इजरायल के शोधकर्ताओं ने जो कल्पना की है उसके मुताबिक  पानी से चलने वाली मोटरकार में दो ईंधन टैंक हैं। एक बोरोन/B नाम का काले रंग का खनिज भरा जाता है , जबकि दूसरे में सिर्फ पानी जाता है। यदि बोरान थोड़ा अपरिचित लगता है, तो आइए हम सोडियम के बारे में बात कर लेते है जिसके लगभग समान गुण ही हैं। आमतौर पर सोडियम केरोसिन में डुबाकर रखना पड़ता है, उसकी छोटी मात्रा भी आप पानी मे डालते ही  रासायनिक प्रक्रिया हो जाती है ।  क्योंकि सोडियम H2O हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच के बंधन को तोडता है। यदि सोडियम की मात्रा अधिक हो तो धमाका होकर रहेगा ! 


  यह गुणधर्म  बोरॉन में भी, लेकिन बोरॉन एक नियंत्रित तरीके से ऊर्जा पैदा करता है। दूसरे शब्दों में कहे तो ये  प्रक्रिया हिंसक नहीं है। मोटर कार के इंजन के लिए एक नियंत्रित प्रक्रिया बनाने की प्रक्रिया पानी है, जिसे भाप बनाने के लिए हीटर से  200 C के तापमान तक गर्म किया जाता है । जिसके बाद भाप एक अलग चेम्बर में प्रवेश करती है और बोरान के साथ मिल जाती है। परिणामी रासायनिक प्रक्रिया पानी से हाइड्रोजन छोड़ती है। हाइड्रोजन को मोटर के इंजन में छोड़ा जाता है। यदि इंजन पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन होता  तो गैस स्वाभाविक रूप से साधारण पेट्रोल या डीजल की तरह हवा की जलता पिस्टन को घुमाता, लेकिन नई तकनीक के अनुसार इंजन के बदले फ्यूल सेल की योजना बनाई जाती है । तो मोटर कार बिजली से चलेगी।


फ्यूल सेल या इंजिन अपना कुछ पावर इस्तेमाल करके  बैटरी को चार्ज भी करता है । यह बैटरी अंततः इलेक्ट्रिक हीटर की गर्मी को जलाए रखती है और पानी को लगातार वाष्पित करती है। भाप पेली चैम्बर में प्रवेश करता है, इसलिए बोरान की एक नई मात्रा हाइड्रोजन के साथ गठबंधन करने के लिए पानी में प्रवेश करती है । 


 इस तरह के निरंतर घटमाल के दौरान दो चीजें पैदा होती हैं ।  पानी और बोरान ऑक्साइड है। पानी हाइड्रोजन के दहन का एक उपोत्पाद है, जो सभी वाष्पित होने के लिए पानी की टंकी में चला जाता है। बोरॉन ऑक्साइड नामक पदार्थ हाइड्रोजन को खोने बाद बचे हुए पानी की गंदगी हैं । अब  यह  मोटरकार के लिए काम का है। फिर भी बिल्कुल बेकार हैं ऐसा भी नही । क्योंक रीसाइक्लिंग प्रक्रिया से उसे फिर से बोरोन का रूप दिया जा सकता हैं । 


   मोटरकार एक पेट्रोल पंप जैसे फ़्यूलिंग स्टेशन और जमा किये हुए अपशिष्ट बोरॉन की मात्रा को पुन: प्रसंस्करण संयंत्र में लाया जाता है। शुद्धि कक्ष में सोलर टॉवर द्वारा गर्म किए गए पानी से मैग्नीशियम को 40 C के तापमान पर गर्म किया जाता है । इसलिए बोरान ऑक्साइड को वापस शुद्ध बोरान में परिवर्तित किया जाता है और ईंधन के नए स्टॉक के रूप में आपूर्ति ईंधन स्टेशन पर भेज दिया जाता  है। दूसरी ओर, मैग्नीशियम खुद को मैग्नीशियम ऑक्साइड में परिवर्तित करता है क्योंकि यह बोरान ऑक्साइड को शुद्ध करता है; इसका मतलब यह है कि बोरान ऑक्साइड के साथ मिश्रित ऑक्सीजन स्वयं अशुद्ध हो जाती है। नतीजतन, इसे परिष्कृत करना होगा ताकि इसे मैग्नीशियम के दूसरे स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है । 

इजरायल के शोधकर्ताओं के प्लान के अनुसार इसके लिए  क्लोरीन का उपयोग करने का प्रस्ताव है। क्लोरीनेटर नामक  बर्तन में, क्लोरीन गैस अपने सभी ऑक्सीजन को छोड़ने के लिए मैग्नीशियम ऑक्साइड के साथ प्रतिक्रिया करता है। एक बार जब ऑक्सीजन को ज़ोस्ट करने के बाद मैग्नीशियम क्लोराइड नामक यौगिक बचता है, जिसमें मैग्नीशियम और क्लोरीन भी होता है। दोनों वस्तुओं को एक लंबे चक्र में महत्वपूर्ण कड़ी है।  इसलिए उन्हें शुद्ध रूप में पुनः प्राप्त करना पड़ेगा। एक अलग कक्ष में दोनों को अलग करने के लिए एक इलेक्ट्रो-लीजर कहि जानी वाली चेम्बर में मैग्नीशियम क्लोराइड के रगड़े से उनको  इलेक्ट्रोलाइट किया जाता है ।  एक ओर क्लोरीन मुक्त होता है, दूसरी ओरमैग्नीशियम अलग हो जाता है। यह चक्र थोड़ा लंबा है, लेकिन एक बार इस चक्र को शरू करने के बाद ये पूरी प्रोसेस  रूप में आत्म-निर्भर है।


   एक बार एक औसत मोटरकार में लगभग 15 किलोग्राम बोरान का क्वोटा भर दे फिर तो वही बोरॉन बार-बार काम आता है। पेट्रोल या डीजल के विपरीत, लगातार नए बोरॉन के लिए भूमि मंथन करना जरूरी नहीं ।  क्योंकि पानी से चलने वाली मोटर बोरॉन का उपभोग नहीं करती है। यह पदार्थ केवल बोरिन ऑक्साइड में परिवर्तित होता है, जिसे वापस मैग्नीशियम बोरान में परिवर्तित करके परिवर्तित किया जाता है । जब मैग्नीशियम स्वयं मैग्नीशियम ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है, तो वही उसे क्लोरीन मैग्नीशियम का अवतार देता है। शुद्धि प्रक्रिया के दौरान मैग्नीशियम क्लोराइड के साथ संयुक्त होने पर इलेक्ट्रोलिसिस क्लोरीन छोड़ता है। संक्षेप में, पूरी प्रक्रिया आत्म-निहित है। कोई बाहरी आपूर्ति की आवश्यकता ही नही रहती  है।


  बेशक, ऊर्जा का स्रोत आवश्यक है, क्योंकि इसके बिना संयंत्र को चलाना संभव नहीं हआई । मैग्नीशियम पाउडर और बोरान ऑक्साइड के मिश्रण को  500 ° C के तापमान पर मैग्नीशियम क्लोराइड को विघटित करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इजरायल के शोधकर्ताओं का कहना है कि बिजली के पारंपरिक स्रोतों के माध्यम से इसे प्राप्त करने के लिए बिजली की आपूर्तिनहीं चाहिए । उन्होंने पूरी प्रोसेस में जीवाश्म ईंधन की सीमा से मोटर को बाहर रखने का फैसला किया है ।  इसलिए उन्होंने बिजली की आपूर्ति के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करने की योजना बनाई है। उन्होंने उच्च काठी के सोलर टावर खड़ा करने का प्रस्ताव रखा  है। टॉवर के चारों ओर सैकड़ों दर्पण सूर्य की किरणों को टॉवर के शीर्ष की ओर केंद्रित करके वहां 1000 ° C का तापमान पानी को वाष्पित कर दे। टर्बाइन और जनरेटर भाप पर चलते हैं। अंत में किलोवाट में पैदा होने वाली बिजली रिप्रॉसेसिंग प्लांट की सभी मशीनरी को सक्रिय रखती है। 


ऊर्जा के अपरंपरागत स्रोतों से संचालित अन्य मोटर्स और इज़राइली मोटर्स द्वारा यहां पानी से संचालित होने के बीच एक बहुत महत्वपूर्ण अंतर ध्यान देने योग्य है। जैसे की इलेक्ट्रॉनिक कारों की बात आती है, तो बिजली शायद थर्मल है । पावर स्टेशन का उत्पादन होता है जो अपनी टरबाइन चलाने के लिए जीवाश्म कोयला, खनिज तेल या प्राकृतिक गैस का उपयोग करता है। हाइड्रोजन कार के वर्तमान संस्करण के लिए, पानी को विघटित करने के लिए उसी शक्ति का उपयोग किया जाता है । कारों के लिए इथेनॉल बनाने वाली शराब टॉवर के शीर्ष पर कच्चे माल के रूप में टक आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला गन्ना भी डीजल पंपों और रासायनिक उर्वरकों की मदद के बिना उसे पैदा करना संभव नहीं है। पेट्रोल के विकल्प में प्राकृतिक तरल पदार्थ; गैस जलाने वाली कारों को केवल एक वैकल्पिक ईंधन के रूप में नहीं माना जाता है, क्योंकि प्राकृतिक गैस पेट्रोल के समान जीवाश्म युक्त होती है। इन सभी मोटरों की तुलना में इजरायल की मोटर की तकनीकी संरचना पूरी तरह से अलग है।  सैद्धांतिक रूप से उन्होंने सभी जीवाश्म अल्सर से छुटकारा पा लिया है। सैद्धांतिक रूप से ये मोटरकार अभी तक नहीं बनी है। इजरायल के वीज़मैन साइंस इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता वर्तमान में इंजन का परीक्षण कर रहे हैं और आवश्यक सुधार कर रहे हैं। प्रारंभिक निष्कर्ष आशाजनक हैं।


शोधकर्ताओं का अनुमान है कि मध्यम आकार की कार 13 किलोग्राम बोरॉन  और 45 किलोग्राम पानी से भर लेने के बाद 5 किलोग्राम हाइड्रोजन का उत्पादन करती है, जिसमें 40 लीटर पेट्रोल से कम ऊर्जा नही होती है। इस ईंधन के साथ, एक मध्यम आकार की मोटर शहरी यातायात में 400 किमी और राजमार्ग पर 500 किमी की दूरी बड़े आराम से काट सकती है।
ईंधन भरने के बाद इतनी लंबी यात्रा केर पाना भी ये भी प्रेक्टिकल दृष्टि से छोटा मोटा लाभ नहीं । दूसरा लाभ हाइड्रोजन के लिए पानी के हाइड्रोलिसिस, हाइड्रोजन के द्रवीकरण, हाइड्रोजन के सटोरेज, और अंत में हाइड्रोजन के सलामती भरे यता के रूप में  हो सकता हैं । ऐसी कई लागतों से बचा जा सकता  है।

 जिसे इजरायल के शोधकर्ता जिसे  टाल न सके ऐसा प्रश्न यह  है, “पहले मुर्गी या अंडा ?”, जब तक पानी से चलने वाली कई मोटरें चलने न लगे तब तक बोरॉन रिप्रॉसेसिंग प्लांट स्थापित करने का कोई मतलब नहीं है, जबकि दूसरी ओर रिप्रॉसेसिंग प्लांट हर दिन कई  टन बोरॉन का उत्पादन न करे तब तक बोरॉन पावर्ड कारे कैसे तैयार होगी ? यह प्रश्न कितना जटिल है, इसका एक उदाहरण देखिए: 


सौर प्रतिष्ठित डीइमलर  क्रिसलर ने कुछ साल फके बोरोन नही पर सोडियम के एक विशेष यौगिक का उपयोग करते हुए नैट्रियम नामक हाइड्रोजन कार बनाई,  और इसे 120 किमी प्रति घंटे की गति से चलाया। रेंज भी 500 किमी से कम नही । फिर भी  कंपनी ने 2006 में पुनर्संसाधन संयंत्रों और ईंधन स्टेशनों की कमी के कारण इस परियोजना को छोड़ दिया।


इसलिए, भले ही जिस तरह से वेयजमान  इंस्टीट्यूट इजरायल के शोधकर्ताओं को भी ऐसा सवाल सताता है तो मानना होगा कि उस प्रसिद्ध कहावत के अनुसार, भले ही आवश्यकता खोज की माँ हो , फिर भी नवजात खोज  पुनर्व्यवस्थित करने के लिए उचित तकनीकी सुविधाओं के साथ एक संरचित प्रणाली के अभाव में कभी वयस्कता तक नहीं पहुंच सकती ।

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