पेडल पावर्ड विमान

पेडल पावर्ड विमान

पेडल पावर्ड विमान

सन 2012 में यूरोप के ब्रिटेन में लंदन ओलंपिक के अवसर पर लंदन से 20 किमी की दूरी पर ग्लाइडिंग क्लब में एक बहुत ही अलग खेल का आयोजन किया गया। उस खेल को बहुत जल्द ओलंपिक में एक खेल के रूप में स्थान मिलेगा ऐसी आयोजकों की गिनती थी। इसलिए ओलपिंक के समय पर ही उसका आयोजन किया गया । ग्लाइडिंग क्लब में विचित्र प्रकार के पाँच विमान थे। पंखों और प्रोपेलर के सिवा साधारण विमान के जैसा उनमें कुछ भी समान नहीं था । सबसे पहली भिन्नता ये की उन विमानों में इंजिन ही नहीं था ! बोलो बिना इंजिन कैसे उड़ते ? लेकिन यही उनकी ख़ास बात थी । पायलट को ही सायकिल की तरह पेडल लगाकर उन्हें चलाना था !

अब ऐसा पहली बार किसी स्पर्धा में हो रहा था ! इनाम 2000 $ नकद ! प्रतियोगिता में भाग लेने वाले पांच विमानों के पायलटों को अपने-अपने विमानों से उड़ान भरकर टेक ऑफ उड़ान की अवधि, गति, दूरी, किसी विशिष्ट स्थान पर उतरना आदि सब पेडल लगाकर करना था । सच कहें तो अपना सर्वश्रेष्ठ कौशल दिखाना था। पुरस्कार के लिए एक बहुत ही दिलचस्प स्पर्धा के बाद 37.7 मीटर के ” एरगलो ” नाम के विमान के पायलट ने वह इनाम जीता ! उस प्लेन में 2.95 मीटर के प्रोपेलर घुमाने के लिए खुद जोर लगाक 400-500 वाट की शक्ति पैदा की तुई । ‘Airglow’ हवा में चढ़ गया उसके बाद 275-300 वाट के साथ काम चल गया।

अब ऐसी स्पर्धा सामान्य नही । क्योंकि विमान केवल मानवशक्ति से उड़ाने के प्रयास सालों से हो रहे हैं और कई प्रयास असफल रहे हैं । बुनियादी और जटिल समस्या मनुष्य का अपना शरीर है । जो अपने वजन के अनुपात में watt उत्पन्न नहीं कर सकता । तुलना के लिए कुछ अंको को जानते है : उड़ते समय हमिंगबर्ड अपने वजन के अनुपात में प्रति किलोग्राम 75 वाट, फलमक्खी 30 और अल्बाट्रॉस 10 वाट का उत्पादन करते हैं । जबकि पैडल चालित विमान उड़ाते समय मानव केवल 5 वोट उत्पन्न करता है। इस प्रकार 50 किलोग्राम का एक मानव 500 वाट से अधिक बिजली उत्पादन नहीं होता है और वह भी लंबे समय तक नहीं, कुछ ही सेकंड में, सहनशक्ति कम होने लगती है।

विमान को शारीरिक ताकत से उड़ाना का पहला विचार पंद्रहवीं शताब्दी में पेंटर-कम-वैज्ञानिक लियोनार्डो द विंची ने सोचा था , लेकिन इस तरह के एक विमान बनाने का लगभग पहला प्रयास कोई चार सौ पचास साल बाद, 1912 में फ्रांसीसी उद्यमियों ने किया। इस तरह का विमान से लगभग दस वर्षों तक प्रतिवर्ष प्रतिस्पर्धा भी आयोजित करते रहे । प्रतियोगिता बहुत विचित्र है और ट्रॉफी प्राप्त करने वाले पहला विमान ‘एविएट’ भी इसलिए विचित्र था कि उसमे प्रोपेलर ही नही था । केवल छोटी और बड़ी पंख और पायलट को बैठने के लिए पान की दुकान जैसी एक छोटी सी जगह थी और दो पहिए थे।

मेन पावर से उड़ने वाले विमान की पहली बार कल्पना करने वाले लियोनार्दो ड विन्ची का स्केच

एविट का पायलट रनवे के अंत में रहकर पैडलिंग शुरू करता इसलिए वह छोटा सा विमान जैसे पंखों वाली साइकिल हो ऐसे दौड़ता ! सामने से आनेवाली हवा से जैसे ही ‘ लिफ्ट ‘ मील जाए कि वह चढ़ने लगता । लेकिन प्रोपेलर की कमी के कारण विमान को थ्रस्ट नहीं मिल सकता था और उसके कारण लिफ्ट नही मिली । इसलिए ‘एविएट’ वास्तव में प्लेन की बजाय साइकिल की तरह कूदने लगा । गलत मत समझो हालाँकि, 1912 से लेकर 922 तक उन्होंने लगभग हर साल वह जीता । वैसे एक तरीके से इसे केवल पेडल-पावर्ड कहा जा सकता है क्योंकि वह टेक-ऑफ के लिए रनवे पर पैडलिंग से उसे प्रवेग प्राप्त किया गया था।

यदि एविएट में प्रोपेलर होता तो निश्चित रूप से वह और उड़ सकता था । यहां तक ​​कि प्रोपेलर को विमान में जोड़ने का कोई तरीका फ्रेंचो को सुजा ही नहीं । वे सिर्फ पेडल को चैन से जोड़ना वे सब जानते थे। पेडल से प्रोपेलर जोड़ने का पहला सफल प्रयास जर्मन टेक्नीशियनो ने किया। सन 1935 में उन्हें ‘मुफली’ नाम का विमान बनाया। विशेष शक्ति के आउटपुट को देखते हुए पायलट उसे टेक ऑफ नही कर पाया । अत्यधिक मोटी रबर की रस्सी से धकेल ने बाद ही वह आसमान पर चढ़ पाया । ‘मुफली’ कॉकपिट में बैठे पायलट ने शरीर की सारी ऊर्जा को काम में लगाकर पैडलिंग करके उड़ान बहरीन। जिनमे सबसे लंबी उड़ान 12 मीटर (2335 फीट) की थी । ये रिकॉर्ड को हम पूरा नही कह सकते।विमान सीधे 50 सेकंड तक हवा में तैरता रहा। गिलोल से विमान को ऊपर उठाया गया था । फिर पायलट के कड़ी मशक्कत करने पर भी धीरे-धीरे ऊंचाई कम हो रही थी।

जर्मन ‘मुफली’ के बाद कई पैडल चालित विमानों का निर्माण किया गया, लेकिन सभी फ्लॉप रहे ! वैसे भी सिर्फ ताकत लगाकर विमान को हवा में चढ़ाना , उड़ाना और वापिस लाने का कार्य चुनौतीपूर्ण था। अत: 1959 में ब्रिटेन के हेनरी क्रेमर नाम के जाने-माने करोड़पति इसमें दिलचस्पी लेने लगे और उसने ऐसा प्लेन बनाने वाले को 5,000 $ नकद देने की घोषणा की। बस शर्त यह रखी कि पायलट को ऐसे विमान का सटीक संचालन करके 1 मील की दूरी को तय कर दिखाना चाहिए। साथ ही उड़ान अंग्रेजी अंक 8 जैसी बने । स्वाभाविक रूप से पायलट के विमान पर पूरे नियंत्रण होने पर ही ऐसा हो सकता था ।

हेनरी क्रेमर ब्रिटिश धनवान जिहोने पेडल पावर्ड विमान के इंजीनियरों के लिए इनाम की घोषणा की

सन 1959 में पककनच हजार बहुत बड़ी रकम थी ।वैमानिकी की ज्ञानी को प्रलोभन रहेगा ही । लेकिन अधिक प्रेरणा असंभव कार्य को संभव बनाकर दिखाने की थी। कार्य अशक्य बनाने वाले कारण तकनीकी और जैविक थे। अगर एक मात्रा के संदर्भ में मानव शरीर मांसपेशियां पक्षी की मांसपेशियों की तरह मजबूत नहीं होती । यानी टेक-ऑफ के लिए अत्यधिक मांसपेशियों की शक्ति का व्यय करने के बाद शरीर में ज़्यादा शक्ति नही रहती । कोई भी मजबूत व्यक्ति पायलट के रूप में चुने जाने का मतलब नहीं, क्योंकि इसका भारी वजन ज्यादा वोट्स का उत्पादन जरूरी था ।
दूसरी तरफ पायलट पतला है तो वह पर्याप्त ताकत नहीं लगा सकता । ऐसी कई समस्याओं को देखते हुए पेडल- वह इंजीनियर को पायलट का वजन, शरीर की शक्ति, पंखों का क्षेत्र, विमान की वायुगतिकीय रचना , भार, प्रोपेलर थ्रस्ट आदि कई पहलुओं के बीच इष्टतम बेलेंस बनाना था ।

अगर यह काम असंभव नहीं था तब भी यह आसान नहीं था। पैडल से चलने वाले प्लेन का बहुत सारे नवीन मॉडल थे, लेकिन किसी के पायलट ने 1 मील (1.5) है एक पंक्ति में किलोमीटर साथ ही अंग्रेजी 8 का आंकड़ा नहीं बना सका । सन 1961 में एक विमान ने टेक ऑफ के बाद 64 मीटर का अंतर काटा। उसी वर्ष दूसरे विमान ने 650 मीटर का अंतर काटा था। सन 1972 में 1239 मीटर का रिकॉर्ड बना । और फिर 1976 में और अधिके अच्छा मॉडल विमान से 2 किलोमीटर तक पहुंचा दिया, लेकिन वह अंग्रेजी का आंकड़ा 8 नहीं बना सके। प्रतियोगिता की स्थिति को पूरा करने के लिए सभी प्रयास विफल रहे । करोड़पति हेनरी का 5000 पाउंड का इनाम जैसे का तैसा रहा । इंजीनियर हतोत्साहित न हो और प्रयास करते रहै इस लिए पुरस्कार राशि धीरे-धीरे बढ़ गई और अंत में, मैंने 50,000 पाउंड कर दिए ।

सबसे पहले पुरस्कारों की घोषणा करने के 18 साल बाद 1977 में अमेरिका के पॉल मैकक्रिडी नाम केपायलट कम इंजीनियर ने एक अजीब सा दिखने वाला विमान बनाया । इसके ढांचे पर कोई तार बन्धे हुए थे । 16 वे साल पर पायलट का लाइसंस लेने वाला ये बंदा एरोनॉटिक्स का भी विशेषज्ञ था । पेडल-पावर्ड के लिए वायुगतिकी के सारे नियम का उसने अध्ययन किया था ।

अमेरिका के पॉल मैकक्रिडी

सभी सिद्धांत बिल्कुल सटीक तरीके से उसने विमान पर लागू किया था । विमान की संरचना बनाने के लिए बाल्सा की बेहद हल्की लकड़ी पसंद की थी। लिफ्ट बेहतर पाने के लिए, विंग की चौड़ाई 29.25 मीटर रखी । और हल्के वजन को बनाए रखने के लिए पंख का फ्रेम पतले पारदर्शी प्लास्टिक शीट के ढक दिया । हवा का दबाव उत्पन्न करना पंखों वाली ताकली बेल्सा लकड़ी टूट न जाए इसलिए पंखों के बीच एल्यूमीनियम का रॉड को क्षैतिज रूप से समायोजित किया गया। दूसरी छड़ सीधी रखी । फिर दोनों को कई तार से बांध दिया ।पायलट की कॉकपिट को पारदर्शी प्लास्टिक से वायुगतिकीय तम्बू जैसा बनाया था। उपस्थित सब को कॉकपिट में पायलट ने साइकिल चलाने के जैसे पैडलिंग करे की जंजीर से जुड़े प्रोपेलर व्हील की गति फिर से जोर लगा रहा था। यह रेकॉन अजीब विमान का नाम पॉल ने गोस्मार कोंडोर रखा।

प्लेन तैयार होने के बाद एक पायलट चुनने का समय आया। पॉल मैकक्रीडी जनता था कि पैडल-चालित विमान को चलाने के लिए पायलट नहीं, बल्कि एक साइकिल चालक चाहिए । कॉकपिट में बैठे विमान का एकमात्र नियंत्रण संभालना ही नही था , असली परीक्षा साइकिल में थी । पेडल संचालित विमान को वही उड़ा सकता था जो खुद के प्रति किलोग्राम वजन से अधिक वाट से बिना थके कैसे पैडल मारता रहे । मैकक्रेडी 24 साल के ब्रायन एलेन नाम के साइकिल चैंपियन को चुना।

एलन को तीन महीने तक कड़ी ट्रेनिंग दी, ‘गोसमर कोंडोर’ से लगभग 500 टेक-ऑफ करवाये । और अंत में 50,000 पाउंड का इनाम जितने के लिए 23 अगस्त 1977 का दिन तय किया।

अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया में हवाई अड्डे पर कैमर पुरस्कार जीतने के प्रयास में उड़ान कार्यक्रम को आयोजित किया गया था। ब्रायन एलन कॉकपिट में बैठ गया। उस समय दर्शकों को पायलट और विमान के बीच का असली अंतर मिल दिखा । ऊंचाई में 18 मीटर, 29.25 मीटर के पंखों और लंबाई में 9.14 मीटर का गोसमर ’ कोंडर के राक्षसी आकार के पास ब्रायन एलन जैसे बौना लग रहा था। विमान का वजन 35 किलोग्राम से कम था, जबकि एलन का वजन 62 किलोग्राम था।

इनाम के लिए क्रेमर ने पुरस्कार के लिए रखी शर्त के अनुसार पेडल पावर्ड विमान को उड़ान भरते समय स्टार्टिंग लाइन और परिष्करण लाइन पर न्यूनतम 3 मीटर (10 फिट की) की ऊंचाई को बनाए रखना था। इसके अतिरिक्त 800 मीटर की दूरी पर आमने सामने रखे स्तम्भ को रांउड लगाकर 8 का फिगर बनाना था। तब ही विमान सही अर्थ में पेडल-संचालित होने का प्रमाण पत्र मिलना था।

जैसे ही ब्रायन एल ने पैडलिंग शुरू कर दी । तुरंत ‘गोस्मार कोंडोर’ के रनवे पर दौड़ने लगा, हवा में चढ़ गया, सामने खंभे की चारों ओर चक्कर लगाया, 8 का फिगर बनाया । सब मिलकर 6 मिनट 27 सेकंड तक वह उड़ता रहा । 18 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति प्राप्त की और कुल दूरी 1.85 किमी । साढ़े सात मिनट इतना भी नहीं, फिर भी वह उपलब्धि क्रेमर पुरस्कार प्राप्त करना और सम्मानित करने में अठारह साल लग गए।

विमान का पायलट ब्रायन एलेन ही उसका इंजन के रूप में किस हद तक काम कर सकता है यही सवाल अब वैमानिकी है । जानकारी के लिए रुचि का विषय बन गया। इसलिए कुछ समय बाद क्रेमर फाउंडेशन ने इनाम की रकम 100,000 पाउंड नकद पुरस्कारों की घोषणा की। इस समय पुरस्कार उसे मिलने वाला था जो पेडल पावर्ड विमान इंग्लिश खाड़ी को पार करेगा । पोल मेकक्रिडी फिर मैदान में आया । इस बार उसे ओर एरोडायनामिक प्लेन तैयार करना पड़ा । पुरस्कार की शर्त के अनुसार उसे कहीं भी बिना रुके 37 किलोमीटर चलना था । अंग्रेजी खाड़ी में आपातकाल उतरने के लिए कोई गुंजाइश ही नहीं थी।

पिछला विमान ‘गोसमर कोंडोर’ था । नए विमान का नाम “गोस्मरी एल्बाटॉस ’रखा गया। एक छोर से दूसरे छोर तक विमान की विंग 29.77 मीटर और क्षेत्रफल 45.34 वर्ग मीटर था। इस विमान को बनाने के लिए जरूरत के मुताबिक कार्बन फाइबर से ढांचा , प्लास्टिक का आवरण और कई तार का उपयोग करके वजन 32 किलोग्राम तक सीमित था। ब्रायन एलन फिर से विमान के पायलट के रूप में को चुना।

साइकिल चालक पायलट 14 जून, 1979 तारीख को ब्रिटेन में फ़ॉक्सटोन नाम के किनारे से दूर ले जाया गया। 18 किलोमीटर की गति से उसने उड़ान भरी। इंग्लिश बे पर पहुंचने के बाद नीचे सिर्फ सागर था । बस बिना थके यात्रा समाप्त करनी थी । पोल को बस इस बात की चिंता थी कि अगर एलन हर मिनट 75 बार प्रोपेलर को नही घुमाएगा का तो वह उड़ने के बदले समुद्र में तैरेगा ! बीच यात्रा में ‘गोसमर अल्बाट्रोस ‘केवल एक चौथाई फुट से समुद्र को छूने से रह गया । सही मौके पर एलन ने जोर लगया और विमान ऊपर उठ गया । इस तरह लगातार 2 घंटे और 49 मिनट तक वह पैडलिंग करता रहा । और 37 किलोमीटर दूर फ्रांस के तट पर पहुंच गया। ये कोई छोटी मोटी उपलब्धि नहीं थी। पोन तीन घंटे तक विमान को बचाए रखने के लिए पैडलिंग करना ये मजबूत मनोबल और मांसपेशियों की शक्ति मांग लेता मुश्किल काम है ।

ब्रायन एलन ने गोस्मर अलबाट्रॉस ’के साथ मानव शरीर को सहन करने वालों का रिकॉर्ड को नौ साल के बाद सबको विचार बदलना पड़ा। अमेरिका का प्रसिद्ध MIT / मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान इंजीनियरों ने 1988 में ‘डिडल्स 88’ नाम से उन्नत डिजाइन के साथ पेडल-संचालितविमान बनाया, जिसकी मदद से वे ग्रीक पौराणिक कथाओं को जिंदा करना चाहते थे।

प्राचीन ग्रीस में डेडलस बहुत प्रसिद्ध मूर्तिकार था । इकारस उनका बेटा था।।किसी कारण से राजा के साथ अनबन के कारण पिता-पुत्री क्रीट नाम के द्वीप पर कारावास भुगतना बारी आई। उड़कर भागने के लिए मोम के पंख लगाकर डिडेल्स ने सफल उड़ान भरकर सिसिली पहुंच गया । इकारस नादानियत करके सूर्य के पास पहुंच गया और मोम पिघलते ही वह समुद्र में गिर गया और मारा गया।

इंजीनियर ‘डिडेलस ग्रीक’ विमान से आधुनिक तरीके से के कथित करतब को आधुनिक तरीके से दोहराना चाहते थे। ‘Gosmer एल्बाट्रॉस की तुलना में तीन गुना दूरी काटना था, यानी विमान का पंख वह 34 मीटर रखा गया। विंग का सतह क्षेत्र लगभग 30 वर्ग मीटर था। उड़ान के लिए निर्धारित ग्रीस के क्रीट द्वीप से सतरार्नी द्वीप तक था । कोनीलेस कोनेलो- थोड़ा अजीब नाम वालके ग्रीक पायलट 4 अप्रैल, 1988 के दिन 116 किलोमीटर की दूरी काट कर दिखाई। 3 घंटे 55 मिनट में का सफर पूरा किया, इसलिए दूरी और समय के दो रिकॉर्ड की स्थापना की। तुलना के लिए ऐसा कहें कि अहमदाबाद से बरोड़ा तक साहसिक कोयला तक की यात्रा की।

कोनेलास चार घंटे की यात्रा करके सतरार्नी द्वीप तक पहुन्चा

इस रिकॉर्ड को स्थापित करने के बाद पेडल-संचालित विमान में दिलचस्पी न रही । क्योंकि हेनरी क्रेमर जैसे हैं एक भी धनवान ने कोई इनाम जांहिर नहीं किया । सालों बाद आज एक पैडल चालित विमान को साहसिक खेलों के क्षेत्र में स्थान दिलाने के लिए प्रयास शुरू हो गए हैं। पुरस्कार राशि के बदले एकोरस कम ओलंपिक स्वर्ण पदक की तरह पुरस्कार के रूप में प्रस्तुत किया गया।

ब्रिटेन की रॉयल एरोनोटिकल सोसाइटी के तत्वावधान में पांच उम्मीदवार यहां तक ​​कि प्रतिद्वंद्वियों के बीच कुछ स्पर्धाएं की जा रही है । जिसमें एयरग्लो ’पेडल-संचालित विमान ने 26 सेकंड में 200 मीटर की दूरी तय कर दिखाई । अब एक नया चुनौतीपूर्ण खेल की दिशा खुल गई है – और यह दिशा शायद ओलंपिक रमोत्सव की ओर की हो भी सकती है !

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