हेलीकॉप्टर का आविष्कार कैसे हु ?

हेलीकॉप्टर का आविष्कार कैसे हु ?

हेलीकॉप्टर का आविष्कार कैसे हु ?

उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दिनों में, अमेरिका के राइट ब्रदर्स ने अपने उपकरण कार्यशाला की छत के नीचे दुनिया की पहली फ्लाइंग मशीन बनाने का प्रयास कर रहे थे । आज जो विरोधाभास लगे ऐसी बात यह है कि उन्हें विमान में कोई दिलचस्पी ही नहीं थी। वे प्लेन के बजाय हेलीकॉप्टर में अपना हाथ आजमा रहे थे। महीनों केई कोशिश के बाद हार मानने की बारी आई । हवाई जहाज की तुलना में हेलीकॉप्टरों को तीन गुना अधिक बिजली की आवश्यकता होती है। राइट ब्रदर्स के पास अभी तक इतना शक्तिशाली पेट्रोल इंजन ही नहीं था, बस इसी कारण से हेलीकॉप्टर भूल गए और विमान की ओर अपना ध्यान केंद्रित किया । और तीन साल बाद दुनिया का पहला विमान हवा में तैरने लगा। हेलीकॉप्टर के बजाय। हवाई जहाज का जमाना पहले आ गया ।

यह केवल स्वाभाविक था कि अन्य खोजकर्ता राइट ब्रदर्स के नाम पर विमान की खोज चढ़ने के बाद दूसरे संशोधक हेलीकॉप्टरों के निर्माण की दौड़ में शामिल होंगे, लेकिन राइट ब्रदर्स को जो इंजन समस्या सामने आई उसी ने सभी प्रयोगात्मक हेलीकॉप्टरों को जमीन पर ही बांध कर रख दिया। समस्या का कारण स्पष्ट था: विंग द्वारा विमान को दी गई लिफ्ट अपना भार उठाती है, इसलिए इंजन को विमान को सीधे नही उठाना पड़ता ।

विमान तभी चलेगा जब वह आगे की गति प्रदान कर दे । विंग लिफ्ट देती है वह वास्तव में विमान और पायलट की संरचना के अलावा इंजन का भार वहन लेती है। लेकिन हेलीकॉप्टर में पंख नहीं होते हैं, इसलिए हेलीकॉप्टर का पूरा वजन केवल पंखे (रोटर) से ही उठाना पड़ता है । अब उसकी पूरी जिम्मेदारी इंजन पर आआ जाती है । साथ ही पूरे हेलीकॉप्टर और सवारी करने वाले सब का वजन उठाने के लिये – भारी-भरकम काम के लिए इंजन बहुत शक्तिशाली चाहिए ! जो हेलीकॉप्टर का भार उठाने में सक्षम हो । अब इतना शक्तिशाली इंजन वर्षों तक उपलब्ध नहीं था इसके व्यावहारिक हेलीकॉप्टर के आविष्कार में पैंतीस साल लगे।

इंजीनियरिंग शोधकर्ताओं ने फिर भी प्रयोग जारी रखा। व्यावहारिक भी नहीं केवल तकनीकी रूप से पृथ्वी के बंधन को मुक्त करने में पहली औपचारिक सफलता पाल्कन नामक एक फ्रांसीसी खोजकर्ता ने हासिल की थी । जिसने हेलीकॉप्टर की रूपरेखा बनाने के लिए कई लंबी-छोटी छड़ें जोड़ीं और बीच में पेट्रोल इंजन को समायोजित किया।

एक धातु के कंकाल की तरह दिखने वाले हेलीकॉप्टर का पहला परीक्षण 13 नवंबर, 1907 को हुआ था। दिन ऐतिहासिक था, क्योंकि 260 किलोग्राम के हेलीकॉप्टर अपनी ओपन एयर सीट पर सवार पॉल कॉनन के साथ ऊर्ध्वाधर लाइन में ऊंची उड़ा और हवा में तैरने लगा । प्राप्त ऊँचाई डेढ़ फीट से अधिक नहीं थी। उड़ान की अवधि मुश्किल से 20 सेकंड थी फिर भी विमान के बाद, हेलीकॉप्टर ने सफलतापूर्वक अपने स्वयं के इंजन के साथ उड़ान भरने की वह पहली घटना थी।

पोल कोर्न का तिन लकड़ी जेसा हेलिकोप्टर

यदि ऑरविले और विल्बर राइट ने विमान का आविष्कार किया है, तो पॉल कॉर्न को को हेलीकॉप्टर का आविष्कारक माना जाना चाहिए। यदि और कुछ नहीं, तो यह तकनीकी रूप से वह सफल हुआ था। अंतर यह है कि आगे और पीछे दो रोटार वाला एक हेलीकॉप्टर व्यवहार्य नहीं था। 1907 में अन्य फ्रांसीसी इंजीनियर, लुई बरेग्यु ने चार पहियों के साथ एक हेलीकॉप्टर का निर्माण किया, जो कसम खाने जितना उड़ा और एक मिनट तक उड़ता रहा। उड़ते समय स्थिरता बनाए रखने के लिए उन्हें चार कोनों पर चार लोगो ने उसे पकड़ कर रखा था । इसी तरह के सवालों ने अन्य फ्रांसीसी शोधकर्ताओं को त्रस्त कर दिया। फ्लाइंग मशीन के रूप में हेलीकाप्टर उनके लिए बहुत जटिल लग रहा था, इसलिए उस दिशा में अधिक प्रयास करने के बदले सब ने विमान पर ध्यान केंद्रित किया। संयुक्त राज्य में जहां हवाई जहाज का आविष्कार किया गया था वहां शोधकर्ताओं का ध्यान केवल हवाई जहाज पर था।

लुइ ब्रेग्यु का जायरो नाम का हेलिकोप्टर

रूस में स्थिति अलग थी। 19 वर्षीय रूसी इगोर सिकोसर्कि कीयेव में एक हेलिकॉप्टर बनाने की योजना बना रहा था। 6 मई 1889 को जन्मे सिकोरसी ने 18 साल की उम्र में अपना पहला हेलीकॉप्टर बनाया और उड़ाया। लेकिन यह एक खिलौना मॉडल था और एक साधारण रबर-बैंड के साथ अपने रोटर को घुमाया। कुछ ही समय बाद, उन्होंने दो रोटार के साथ 20-बैंड में थोड़ा बड़ा हेलीकॉप्टर उड़ाया । जोर हवा में तैरने लगे। इस तरह के मॉडलों को सिद्धांत का परीक्षण करने या मन का मनोरंजन करने के लिए काफी अच्छा माना जाता है, लेकिन समानव आकाशी हेलीकॉप्टर की कल्पना कर चुके सिकोस्क्री की महत्वाकांशा उससे पूरी नही हो सक्ति थी। रूसी शाही नौसैनिक स्कूल में भाग लेने के बाद, सिकोस्क्री 17 साल का हुआ । उनके मानस शास्त्री पिता ने उन्हें 1906 में एक इंजीनियरिंग कोर्स के लिए फ्रांस भेजा, जहाँ पॉल कॉर्न और लुई ब्रैग ने उनके (कुल विफल) हेलीकॉप्टर को उड़ाया। ढांचा अभी भी बना रहै थे ।

सिकोस्क्री ने अपनी परियोजना के बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त की। अगले वर्ष (1907) रूस वापिस लौटने के बाद यह भी सीखा कि दोनों हेलीकॉप्टरों ने अपने आविष्कारकों को निराश किया था। हवा के साथ उनकी जमीन से ज्यादा दोस्ती थी। शायद इस लिये की इंजिन की ताकत कम ओढ़ रही थी । दूसरा कारण सम्भवतः यह भी हो सकता था कि रोटर के विकर्ण पंख हवा के ऊपर और नीचे हवा को पर्याप्त रूप से धक्का नहीं दे पा रहे थे । इसलिए हेलीकॉप्टर नीचे से ऊपर तक नहीं चढ़ सकता था । दोनों कारण ऐसे हैं कि आसानी से उसे निपटाया नहीं जा सकता है। 1907 के बाद, फ्रांसीसी इंजीनियरों ने हेलीकॉप्टर के निर्माण को मिशन असंभव मानकर अंत में उसे मिशन इम्पॉसिबल मानकर आखिर में विमान में अपना ध्यान केंद्रित कर लिया ।

इगोर सिकोव्स्की की दिलचस्पी हालांकि नहीं बदली। उन्होंने एक हेलीकॉप्टर बनाने का फैसला किया और पेरिस चले गए। तीन साल पहले सिककोस्की ने जो पेरिस देखा वह फ्रांस की राजधानी थी लेकिन अब यह विमानों के आलम की राजधानी भी बन गया था। कस्बे के कुछ हिस्सों में दरार वाले मोटरबाइक इंजनों से सुसज्जित प्रायोगिक विमान जैसे टिड्डे जैसे प्रयोगात्मक विमान टेकऑफ करने लगे थे। इंजन की खराबी के नीचे गिरते विमान का तकलादी ढांचा कबाड़ में बदल जाता था । फिर भी जैसे कुछ हुआ ही न हो ऐसा मानकर हवा के मलबा इस संरचना के धुएं को घुमा रहा था और फिर भी हवा के दूसरे गोताखोर अपने टेक-ऑफ और लैंडिंग को जारी रखते थे । क्योंकि वैमानिक क्षेत्र में प्रयोग के नाम पर खोले गए आकाशी साहसो का वह जमाना था ।

एक फ्रांसीसी पायलट ने सिकोस्क्री से पूछा: “सबसे अच्छा इंजन कौन सा है?”
पायलट ने तुरंत उत्तर दिया:। कोई नहीं। सब बेकार है। ‘ सिकोस्की ने एक और सवाल पूछा: “सब से कम खराब इंजन कौन सा है ?” पायलट का जवाब: “इंजन जिसमें न्यूनतम भाग है वही सबसे अच्छा हैं, क्योंकि मूल भागों में कुछ भी अच्छा ही नहीं होता है।”

पायलट की सलाह के बाद, सिकोसर्कि ने 6-हॉर्सपावर का पेट्रोल इंजन खरीदा और रूस लौट आया। उन्होंने कीयेव में घर के पिछवाड़े में एक हेलीकॉप्टर भी बनाया, जो एक बड़े उल्टे छत के पंखे जैसा दिखता था। इंजन शुरू करने के बाद हेलीकॉप्टर बार-बार छींकता था जैसे कि टेक-ऑफ के लिए तैयार है, लेकिन एक सेंटीमीटर जमीन नहीं छोड़ी गई। हेलीकाप्टर की भार वहन क्षमता 162 किलोग्राम थी जबकि खुद हेलीकॉप्टर का वजन 207 किलोग्राम था। जाहिरा तौर पर, सिकोस्की की विफलता पॉल कोर्न और लुइस ब्राग की असफलताओं से भी बड़ी थी। महीनों बाद उन्होंने एक अलग डिजाइन के अनुसार एक नया हेलीकॉप्टर बनाया । लेकिन जमीन पर ही पड़ा रहा ।

सिकोसर्कि ने मान लिया कि अब तीसरी कोशिश के पीछे खर्च करना बेकार है । जब तक शक्तिशाली इंजन उपलब्ध न हो तक व्यवहार्य हेलीकॉप्टर नहीं बनाया जा सकता । सकोसर्कि ने भी आख़िर में विमान में अपना हाथ आजमाने का फैसला किया । वह भी उन शोधकर्ताओं में ही शामिल हो गया । उसने सबसे पहले दो-पंखों वाला S-1 नाम का विमान बनाया जो साइकिल के पहियों पर लंबे समय तक चलने के बाद भी उड़ान नहीं भर पाया। सिकोसर्कि उसे बार बार उसे सड़क पर ले जाकर दौड़ाया लेकिन लेकिन S-1 उसकी न उड़ने की जिद ओर ही अड़ा रहा। लगातार मिली तीन असफलताएं दिल तोड़ने वाली थीं, क्योंकि हेलीकॉप्टर या विमान को महीनों तक दिन और रात की महेनत के बिना बनाया नही जा सकता था। स्कॉर्सेसी ने एस -2 को चौथे और अंतिम प्रयास को देखने के लिए थोड़ा बड़े आकार के विमानों का निर्माण किया गया। कैनवास
प्लेन, ट्विस्टेड रॉड विंग्स, साइकिल व्हील्स, पल्स, स्टील वायर, कंट्रोलिंग के लिए हैंडल आदि के जटिल ढांचे जैसा वह विमान शरू में टेक-ऑफ के दौरान कंगारू की तरह कूदता था। सातवे प्रयास के बाद वह 30 फीट (7.5 मीटर) की ऊंचाई पर चढ़ गया और लगभग 5 मिनट तक उड़ा । नौसिखिए पायलट सिकोसर्कि ने फिर इसे बतख की तरह मोड़ने की कोशिश की और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उसके सब अंजर पंजर निकल गए और मलबे के नीचे सिकोसर्कि नंगे पैर मुश्किल से बाहर निकल पाया ।

विमान का कबाड़ बन गया । लेकिन इसके निर्माता के लिए ! यूरेका! ‘ था। इसे नियंत्रित करते समय उससे हुई गलती के कारण दुर्घटना हुई थी। विमान में कोई खराबी नहीं थी। इसलिए सिकोसर्कि ने अपना काम जारी रखा और ज्यादा से ज्यादा बड़े प्लेन बनाता रहा । सरकार के वित्तीय समर्थन से सन 1913 में उसने चार इंजिन वाला Grand नाम का जो विमान बनाया उसका वजन 4070 किलोग्राम था और लगभग 60 फीट [30 मीटर] के पंख वाला था। यह विमान दुनिया का सबसे बड़ा विमान था। सिकोसर्कि पहला इंसान था जिसने चार इंजन वाला विमान उड़ाया । रूस के ज़ार निकोलस ने उस विमान का परीक्षण उड़ान देखने के लिए खुद बाल्टिक सागर के तट पर विमान कारखाने के हवाई अड्डे पर गए । शाही मुहर वाली सोने की घड़ी सिकोसर्कि को उपहार में दी । जब अगले वर्ष प्रथम विश्व युद्ध छिड़ा, तो सिकोसर्कि ने ज़ार की सेना के लिए ऐसा 79 विमान बनाये।

वे सन विमान वास्तव में देश के लिए बनाये गए थे । लेकिन ज़ार के खिलाफ उठे बल्शेविक आंदोलनकारियो ने सिकोसर्कि को ध्यान में रखा । सन 1917 में कम्युनिस्ट क्रांति के बाद ज़ार को पद्भ्र्स्ट कर दिया गया और उनके हजारों सरकारी नौकरशाहों की तरह सिकोसर्कि को विमान कारखाने के प्रबंधक के रूप में निकाल दिया गया । नई क्रांतिकारी सरकार का यह कदम साफ किन्नाखोरी थी । सिकोसर्कि को एक कम्युनिस्ट सरकार के निरंकुश शासन के निचे जीने की कोई इच्छा नही थी। इसलिए अगले साल उसने अपने परिवार के साथ देश छोड़ दिया और वहां से फ्रांस चला गया ।

एक कुशल विमान डिजाइनर के रूप में उनका नाम फ्रांस में अज्ञात नहीं था, लेकिन उन्हें देशांतर करने के कारण संकुचित नीति वाले उस देश में उसका कोई भाव नहीं पूछा गया । यहां तक उसके परिवार के लिए दो वक्त का खाना भी दिक्कत से मिलता था । सिकोसर्कि का कौशल और उसकी असाधारण प्रतिष्ठा के अलावा बेशुमार धन कमा सके ऐसी थी । यह दोहरी आय केवल मुक्त अर्थव्यवस्था वाले अमेरिका में संभव थी । जहां हेनरी फोर्ड और थॉमस एडिसन जैसे वैज्ञानिक बसे हुए थे ।

सन 1919 में सिकोसर्कि भी अपने परिवार के साथ अमेरिका पहुंचे। चार साल के संघर्ष के बाद, वह 18 वर्ष के हो गए । अन्य रूसी शरणार्थियों (पूर्व शरणार्थियों ) से दान पाकर उन्होंने न्यूयॉर्क में एक विमान कार्यशाला के रूप में एक कारखाना स्थापित किया । जिसमें दो-इंजन वाले परिवहन विमान बनाने शरू किये ।

फिर चार इंजन वाले विमान बने । जो अमेरिका में प्रसिद्ध हो गए। एयरलाइंस पैन अमेरिकन बैनर ने अटलांटिक से लेकर यूरोप तक की यात्रा शुरू की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हवाई यात्रा सन 1937 में शुरू हुआ । लेकिन जिस तरह ऊंट हमेशा मारवाड़ की ओर देखता है उसी तरह सिकोसर्कि की नजर हेलीकॉप्टर पर टिकी थी। एक विमान की तरह लंबी दौड़ लगाए बिना अब सीधे उर लाइन चढ़ने वाली मशीन बनाने के लिए समय और संजोग अनुकूल बन गए थे । रूस छोड़ने के बाद से दो दशकों के दौरान, वैमानिकी के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का विकास हुआ था ।

शक्तिशाली इंजन उपलब्ध थे जो हेलीकॉप्टर को आवश्यक शक्ति दे सकते थे। अड़तालीस वर्षीय सिकोसर्कि के पास खुद एक लंबा अनुभव था और वह संकीर्ण डिजाइन का एक व्यावहारिक हेलीकॉप्टर बनाने में सक्षम था। विमानों की बढ़ती मांग ने हालांकि उन्हें उस काम के लिए समय नहीं निकालने दिया। फुरसत का समय दूसरे साल यानी सन 1938 में साल में आया। अमीर अमेरिकी अर्थव्यवस्था महामंदी में फसने से लोगो ने अब हवाई यात्रा कम कर दी । कुछ एयरलाइनों को बंद कर दिया गया जिससे सिकोसर्कि को नए ऑर्डर मिलने बंद हो गए । अब उसे थोड़े समय के लिए एयरलाइन व्यवसाय को बंद करने का समय आ गया । लेकिन दूसरी ओर, मंदी का अच्छा परिणाम यह आया कि हेलीकॉप्टर बनाने में रुचि और काबिलियत रखने वाले सिकोसर्कि का दिमाग सालो बाद फिर से उसे उस दिशा में मस्तिष्क चलाने के लिए समय मिल गया । यह बचपन से ही उसका पसंदीदा विषय था । वह फिर से उस मे डूब गए ।

उन्नीसवीं सदी के अंत में विल्बर राइट, जिन्होंने हेलीकॉप्टर के निर्माण के प्रयासों को बंद करके विमान का प्रोजेक्ट हाथ मे लेने वाले विल्बर राइट ने 1009 में कहा था कि एक हवाई जहाज की संरचना को डिजाइन करना मुश्किल है, लेकिन अगर सही हॉर्स पावर का इंजन सुलभ हो जाता है तो हेलीकॉप्टर का निर्माण करना मुश्किल नहीं है । विल्बर की धारणा गलत थी – या उसने जो हेलीकॉप्टर कहा था, वह रोटर के अलावा एक प्रोपेलर से लैस था। हेलीकॉप्टर का फ्रंट-माउंटेड प्रोपेलर इसे आगे बढ़ाता है, जबकि घूमता हुआ सिर इसे हवा में घुमाता है। रोटर एक बल्कि दो और उन्हें एक से विपरीत दिशाओं में घूमनी चाहिए। क्योंकि दक्षिणावर्त घूमता हुआ रोटर अपने स्वयं के टॉर्क के साथ हेलीकॉप्टर की संरचना को विपरीत दिशा में घुमाता है जो हेलीकॉप्टर को अस्थिर बना देता है जिसे स्थिर करने के लिए उसका टॉर्क काटने के लिए उसे एंटी-क्लॉकवाइज घुमाना जरूरी है।

डबल रोटर वाला आगे की और प्रोपेलर वाला फोक का Fa- 61 हेलिकोप्टर

इस प्रकार का पहला सफल हेलीकॉप्टर 1937 में हेनरिक फॉक नाम के एक जर्मन इंजीनियर ने बनाया था (सिकोसर्कि इस क्षेत्र में आया उस के एक साल पहले )। हिटलर के सत्ता में आने से पहले फॉक के पास अपनी खुद की कंपनी थी । FW/ फॉल्क वुल्फ में विभिन्न प्रकार के विमान का उत्पादन कर रहा था, लेकिन नाज़ी न होने के कारण हिटलर ने उसकी कंपनी का राष्ट्रीयकरण कर दिया। हेनरिक फॉक ने तब हेलीकॉप्टर पर अपने कौशल का परीक्षण के साथ केवल आत्मसंतोष के लिए घर के पिछले परिसर में स्पेयर पार्ट्स बनाने लगा ।

हेलिकॉप्टर को आकाशी वाहन के रूप में भले कोई अच्छी बात न देखने वाले यूरोपी अमरीकी संशोधको को सरप्राइज तब मिला जब Fa-61 प्रकार का सिंगल प्रोपेलर और दो-रोटर हेलीकॉप्टर ने 11,243 फीट (3428 मीटर) की ऊंचाई पर 122 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से 1 घंटे और 20 मिनट तक उड़ान भरी। उन्होंने एक ऐसा विश्व रिकॉर्ड बनाया जो शोधकर्ताओं की कल्पना में भी नहीं था।

हेलीकॉप्टर का डिजाइन हालांकि प्रारंभिक था। फ़ैंक ने आगे की गति के लिए आगे एक प्रोपेलर सेट किया था । ऊपर की ओर उठने के लिए विपरीत दिशाओं में दो रोटार घूमते थे । एक क्लॉकवाइज और एक एंटी-क्लॉकवाइज। लेफ्ट-राइट टर्न सुकान कि मदद से लिया जाता था। ऊपर और नीचे जाने के लिए रोटर की गति को बढ़ाया या घटाया जाता था।

हेनरिक फॉक के एफए -61 मॉडल ने कई शोधकर्ताओं को प्रभावित किया, लेकिन सिकोसर्कि को नहीं। उनके पास पहला सवाल था कि हेलीकॉप्टर में उसका कुल भार बढाने के लिए दो रोटर क्यों होना चाहिए? दूसरा सवाल यह है कि फॉरवर्ड मोशन के लिए प्रोपेलर के लिए विशेष प्रावधान करके भार बढ़ाना क्यों है? दोनों सवालों को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने VS-300 नामक एक अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर बनाया, जिसे सितम्बर 14 , 1939 के दिन हवा उड़ाया। राइट ब्रदर्स विमान द्वारा विमानन के क्षेत्र में पहली क्रांति के बाद दूसरी क्रांति हेलीकाप्टर से हुई भविष्य के लगभग सभी हेलीकॉप्टर सिकोसर्कि की डिजाइन के आधार पर बनने वाला था । अब ये वाहन प्रायोगिक से व्यावहारिक बनाने वाला था।

इगोर सिकोसर्कि के VS-300 के लिए क्रांतिकारी शब्द के सिवाय दूसरे शब्द का उपयोग नहीं किया जा सकता है। हेलीकॉप्टर निस्संदेह फ़्यूजलाज के बिना था। कोई कॉकपिट भी नहीं था। हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि उसकी यंत्र रचन बेहद युक्तिभरी थी ।

सिकोसर्कि तीन पंखों की एक रोटर के साथ संचालित होता था, इसलिए हेलीकाप्टर के वजन को 3 किलोग्राम तक सीमित करना संभव था। रोटर का घूमता हुआ टॉर्क हेलीकॉप्टर के शरीर के विपरीत दिशा में घूमता है जिससे प्रतिक्रिया समाप्त हो जाती है। सिकोसर्कि ने वीएस -300 के लिए पूंछ के भाग पर – अक्ष पर एक मिनी रोटर की व्यवस्था की थी जिसका थ्रस्ट हेलीकॉप्टर की काया को धक्का देकर स्थायी रखता था। संक्षेप में, क्रिया की प्रतिक्रिया करके उसका छेद काट दिया जाता था । सिकोसर्कि ने ऐसी योजना बनाई की दूसरे बड़े रोटर की कोई जरूरत नहीं थी। परिणाम एक मुख्य रोटर से कम चल गया और कुल वजन में एक अच्छी कमी आई थी।

जहां तक ​​आगे की गति के लिए प्रोपेलर का संबंध है, उस बोझिल उपकरण से बचने के लिए मुख्य रोटर के पंखों का झुकाव उनकी परिपत्र गति के दौरान लगातार बदलती रहे ऐसी व्यवस्था उसने की थी । थोड़े विसातर से कहे तो VS-300 हैंडलिंग के लिए दो थ्रोटल स्टिक थी । सिकोसर्कि ने जिसे कलेक्टिव पिच कहा उस स्टिक को खींचने के बाद सभी पंखों का कोण बढ़ जाता था । उपर की ज्यादा हवा को नीचे धकेल ने से लिफ्ट को बढ़ाया गया और हेलीकॉप्टर तुरंत ऊपर चढ़ने लगता था । स्टिक को खींचने के बदले नीचे झुका दे तो हेलीकॉप्टर के सब पंख के कोण कम होने के कारण लिफ्ट कम हो जाती और हेलीकॉप्टर नीचे उतरने लगता । ये प्रक्रिया सरल थी।

सिकोस्र्की का प सफल हेलिकोप्टर vs – 300

सिकोसर्कि ने अधिक परिवर्तनशील कोण, संकीर्ण आयोजन हेलीकॉप्टर के फॉरवर्ड और बेकवर्ड और लेफ्ट राइट गति के लिए करना पड़ा । और वही आगे जाकर क्रांतिकारी साबित हुआ । इन कार्यों के लिए उपयोग की जाने वाली छड़ चक्रीय है इस कार्य के लिए इस्तेमाल होने वाला दंड cyclic pitch stick के नाम से जाना गया । लेबल किया गया। उदाहरण के लिए, यदि आगे की गति के बारे में बात करते हैं तो चक्रीय पिच की छड़ी को आगे की ओर किया जाता था। तब पंखों का झुकाव एक निश्चित दिशा में बदल जाता और लगातार बदलती रहती थी । आगे के पंख आगे जाने के लिए जब 180° का अर्धवृत्त को काटता है उस दौरान उसका झुकाव कम होता है, लेकिन सबसे दूर के बिंदु पर पहुंचने के बाद, शेष अर्धवृत्त पूरा करने के लिए फिर वापिस जाते समय वह क्रमिक रूप से धीरे-धीरे बढ़ता जाता था ।जब अधिक मात्रा में हवा को पीछे की ओर धक्का मिलता है, तो हेलीकाप्टर आगे बढ़ता था। रिवर्स में हेलीकाप्टर को उड़ाना हो तो स्टिक को खींचने के बाद उसका क्रम उलट जाता था । जब हेलीकॉप्टर की पूंछ पास आकर यह हेलीकॉप्टर की आगे की ओर बढ़ने लगता था। यहां तक ​​कि जब हेलीकॉप्टर को मोड़ के बिना बाएं या दाएं झुकना पड़ता है । ट्रांसवर्सल का एक ही मूल सिद्धांत लागू किया गया था। पीछे के मिनी रोटर का विकर्ण तब अधिक होता है जब आपको एक मोड़ लेना होता है। हेलीकॉप्टर उतारना हो तक ऑपरेटर उस समय अपने पैरों के नीचे पैडल दबाता था ।

वह दुनिया का पहला हेलीकॉप्टर था । बाद में उसी की डिजाइन के मुताबिक बनने लगे । बाद में एंबुलेंस से लेकर गनशिप तक कई भूमिकाएं निभाने लगे। बहुत कम आविष्कारक ऐसे होते हैं जिसे संशोधक खुद उसकी क्रांति को देखते है । सिकोसर्कि वह खुदनसिब इंसान था ।

26 अगस्त, 1972 को जब वह 83 की उम्र में मर गए, तो दुनिया में 25,000 से अधिक हेलीकॉप्टर थे। युरोल संयुक्त राज्य भर में सैकड़ों स्थानों में संचालित यात्रियों के लिए हेलीकाप्टर शटल सेवा शरू थी । अंग्रेजी चैनल का मरीन तूफान में फंसे नाविकों को बचाने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया। रूस के साइबेरिया में बंद लूप औद्योगिक उपकरणों के टन को ज्यादातर भारी शुल्क वाले हेलीकाप्टरों द्वारा ले जाया जाता था। तेल के कुओं को जोड़ने के लिए हेलीकॉप्टरों का उपयोग किया गया था। वियतनाम युद्ध में हेलीकॉप्टरों ने प्रमुख भूमिका निभाई, थी । जब विमान वाहक और मानवरो ने हेलीकॉप्टर को पनडुब्बी ने हेलीकॉप्टर को युद्ध का हथियार बनाया।

इगोर सिकोसर्कि ने जिस क्रांति का चक्र चलाया उसका दूसरा दौर आज भी शरू है । जैसे जैसे टेक्नोलॉजी के नामनपर हेलीकॉप्टर में नए नए हीरे जड़ लिए जाते है उसी तरह वह एक सामान्य फ्लाइंग मशीन ज्यादा आधुनिक बन जाता है। एक ऐसा अवतार जो सिकोसर्कि ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था फिर भी ये सब आख़िर में तो उसी की कल्पनाशक्ति के कारण ही है ।

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